मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं के कार्य-कलापों का प्रभावी ढंग से अनुश्रवण एवं उनके कार्मिकों के अधिष्ठान सम्बन्धी विषयों के समाधान के सम्बन्ध में बैठक ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि सार्वजनिक उद्यम एवं निगमों को 3 श्रेणियों में बांटा जाए। अच्छा प्रदर्शन कर मुनाफे में रहने वाले सार्वजनिक उपकर्म एवं निगम श्रेणी ‘ए‘ में, औसत प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों एवं स्वायत्तशासी संस्थानों को श्रेणी ‘बी’ में और निम्न प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों एवं स्वायत्तशासी संस्थानों को ‘सी‘ श्रेणी में रखा जाए। अच्छा प्रदर्शन करने वाले निगम एवं संस्थानों को भत्तों आदि के लिए स्वतंत्रता दी जाएगी एवं अपने स्तर से निर्णय ले सकेंगे। ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणी के सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम आदि अच्छा प्रदर्शन कर निर्धारित मानदण्डों को पूरा कर श्रेणी ‘ए‘ में आ सकेंगे। इससे निगमों में प्रतियोगी भावना भी जागृत होगी और प्रदर्शन में सुधार आएगा।

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मुख्य सचिव ने सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को मजबूत बनाते हुए 15 दिन में मीटिंग कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं के कार्य-कलापों का प्रभावी ढंग से अनुश्रवण एवं लक्ष्य आदि निर्धारित करने सम्बन्धी विषयों के समाधान हेतु केन्द्र सरकार द्वारा की गयी व्यवस्था को राज्य में भी लागू करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अरविन्द सिंह ह्यांकी, विनय शंकर पाण्डेय सहित विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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